स्कैम 1992 द्वारा यह खुलासा किया गया कि किस प्रकार से 2020  में फिल्म स्टार प्रतीक गांधी की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई। प्रतीक गांधी उनकी पत्नी भामिनी ओझा की ब्रेन ट्यूमर की बीमारी के लिए भी बताते हैं और यह भी कहा कि किस प्रकार से उनके पिता उनसे हमेशा के लिए दूर चले गए।

प्रतीक गांधी की एक वेब सीरीज ‘स्कैम 1992’ काफी लोकप्रिय हो रही है जिसमें भारतीय स्टॉकब्रोकर हर्षद मेहता के चरित्र को दर्शाया गया है, इसमें प्रतीक गांधी के काम की बहुत सराहना की जा रही है। इसी विषय में हाल ही में प्रतीक गांधी ने बताया कि किस तरह से वर्ष 2020 ने उनके जीवन को कई मायनों में बदल कर रख दिया। उन्होंने अपनी पत्नी भामिनी ओझा के ब्रेन ट्यूमर के बारे में भी बताया तथा यह भी बताया कि किस प्रकार से उन्होंने अपने पिताजी को सदा के लिए खो दिया।

 

एक रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा की स्कैम 1992 मैं इस साल  एक एक्टर  के तौर पर उनकी मान्यता बदल गई। उन्होंने स्पॉटबॉय से भी कहा की, “वर्ष 2020 मेरे लिए कई मायनों में मेरी जिंदगी को बदलने वाला वर्ष रहा है।  इसकी सबसे बड़ी वजह स्कैम 1992 है। इसी के कारण मुझे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हुई। मैं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी गया। इसके साथ ही मुझे अच्छे ऑफर भी मिलने लगे अब मुझे एक एक्टर के तौर पर गंभीरता से लिया जा रहा है।

प्रत्येक गांधी से जब यह पूछा गया कि वे COVID-19 महामारी से कैसे बाहर निकले, तो उन्होंने बताया, “एक परिवार के रूप में, हमने कभी ज्यादा असहाय अनुभव नहीं किया। यह अनुभव बहुत बुरा था। मेरा भाई COVID -19 होने पर अस्पताल में भर्ती था।  मैं, मेरी पत्नी मां और बेटी कोरोना पॉजिटिव थीं।  मैं अस्पताल में अपने भाई से भी मिलने नहीं जा पाया। ईश्वर की दया से हम बच गए।  अब तो हम सभी ठीक हैं परंतु इस अनुभव से मुझे एक बहुत बड़ी सीख मिली। ”

फिर उन्होंने अपनी पत्नी के ब्रेन ट्यूमर सर्जरी के बारे में बताते हुए कहा कि कैंसर होने की वजह से उनके पिताजी की भी मृत्यु हो गई और वे उनसे दूर चले गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि  “मैंने अपनी पत्नी के ब्रेन-ट्यूमर ऑपरेशन के दौरान और मेरे पिता के कैंसर के इलाज से पहले उनके इमरजेंसी कंडीशन देखी थी, जब हमने उन्हें खो दिया था। अतः इन सारी परिस्थितियों के दौरान, मैं डॉक्टरों से मिलने, सबसे अच्छी दवाएँ खरीदने आदि की कोशिश कर रहा था, लेकिन इस बार क्योंकि मैं कुछ नहीं कर सकता था। 

मैं बाहर नहीं जा सकता था, इसलिए खुद को बहुत असहाय महसूस कर रहा था। मुझे ऐसा अनुभव हो रहा था कि जैसे हमारे बस में कुछ भी नहीं होता है। कोई शक्ति होती है जो हमारे लिए सब कुछ तय करती है। ”

प्रतीक गांधी गुजराती रंगमंच और सिनेमा में काम करते हैं और उन्हें बे यार, रॉन्ग साइड राजू शादी के लिए खास तौर पर जाना जाता है।

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